भारत और फ्रांस के बीच हथियारों को लेकर हुए अब तक के सबसे चर्चित सौदे राफेल पर उठे तमाम सवालों के ऊपर आज सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार को क्लीन चिट दे दी है। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता में सर्वोच्च न्यायालय की तीन सदस्यीय बेंच ने शुक्रवार को राफेल सौदे की जांच और इस मामले में दर्ज किए जाने वाले मामले को लेकर दायर की गई सभी याचिकाओं को सिरे से खारिज कर दिया। गौरतलब है कि राफेल सौदे को लेकर दायर याचिकाओं पर 14 नवंबर को सुनवाई पूरी हो चुकी थी तथा न्यायालय ने 14 दिसंबर तक के लिए फैंसला सुरक्षित रखा था।
चीफ जस्टिस ने कहा कि कीमत देखना न्यायलय का काम नहीं:
मुख्य न्यायमूर्ति रंजन गोगोई, जस्टिस संजय किशन कौल और जस्टिस केएम जोसेफ की तीन सदस्यीय न्यायिक पीठ ने राफेल सौदे के मामले के तहत अपने निर्णय में कहा कि, ”विमान की कीमत देखना कोर्ट का काम नहीं है, लेकिन राफेल विमान खरीद की प्रक्रिया में शक की कोई गुंजाइश नहीं है। कारोबारी पक्षपातों जैसी कोई भी बात इस सौदे में सामने नहीं आई है।” मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि ”हमने सौदे की पूरी प्रक्रिया को पढ़ा है। इस सौदे की प्रक्रिया पूरी तरह सही है, और राफेल विमान की गुणवत्ता पर भी कोई सवाल नहीं है।”
प्रशांत भूषण ने कहा, न्यायालय का निर्णय गलत:
राफेल पर सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय के बाद वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि हमने सौदे पर जांच की मांग की थी, जो कि पूरी तरह जायज है। न्यायालय ने याचिका खारिज कर गलत निर्णय दिया है। इसी के साथ भूषण ने इस मामले में पुनर्विचार याचिका दायर करने के संकेत भी दिए।
कांग्रेस के नहीं, पूर्व भाजपा नेताओं ने दायर की थी याचिका:
गौरतलब है कि भारत-फ्रांस के बीच हुए राफेल सौदे में अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए सबसे पहले वकील मनोहर लाल शर्मा ने जनहित याचिका दायर की थी। इसके बाद एडवोकेट विनीत ढांडा ने सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में इस पूरे सौदे की पारदर्शी जांच करने के लिए याचिका दायर की थी। भाजपा के पूर्व मंत्रियों एवं नेताओं यशवंत सिन्हा एवं अरुण शौरी, आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह एवं वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने भी राफेल सम्बंधित जांच के लिए सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी।
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इन याचिकाओं में न्यायालय से अनुरोध किया गया था कि राफेल विमानों के सौदे में आरोपित सभी अनियमितताओं की जांच कर सीबीआई को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया जाए। याचिकाओं पर सुनवाई करने के बाद सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इन याचिकाओं को खारिज कर दिया गया है।